Jab Tak Meri Nigaah Mein Tera Jamaal Hai
جب تک مری نگاہ میں تیرا جمال ہے
जब तक मिरी निगाह में तेरा जमाल है
ग़ज़ल
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फ़ना बुलंदशहरी1912–1986
एक महान सूफ़ी शायर और उस्ताद क़मर जलाली के शागिर्द, जिन्हें उनके विश्वप्रसिद्ध कलाम "मेरे रश्क-ए-क़मर" के लिए जाना जाता है।
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