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आशिक़ी

सभी 105अशआर 0ग़ज़ल 105
ग़ज़ल105
उम्र भर हम रहे शराबी से
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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