Raaz-e-Ulfat Chhupa Ke Dekh Liya
راز الفت چھپا کے دیکھ لیا
राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंراز الفت چھپا کے دیکھ لیا
دل بہت کچھ جلا کے دیکھ لیا
Raaz-e-ulfat chhupa ke dekh liya
Dil bahut kuchh jala ke dekh liya
राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
दिल बहुत कुछ जला के देख लिया
اور کیا دیکھنے کو باقی ہے
آپ سے دل لگا کے دیکھ لیا
Aur kya dekhne ko baqi hai
Aap se dil laga ke dekh liya
और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
وہ مرے ہو کے بھی مرے نہ ہوئے
ان کو اپنا بنا کے دیکھ لیا
Woh mire ho ke bhi mire na hue
Un ko apna bana ke dekh liya
वो मिरे हो के भी मिरे न हुए
उन को अपना बना के देख लिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू के वो अहद-साज़ शायर हैं जिन्होंने इश्क़ की नफ़ासत को इन्क़िलाबी सोच से जोड़कर दुनिया भर में शौहरत हासिल की और अपने विचारों के लिए जेल भी गए।
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