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बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़लाक से है
परवीन शाकिर द्वारा
بخت سے کوئی شکایت ہے نہ افلاک سے ہے
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नाले का आज दिल से फिर लब तलक गुज़र है
मीर तक़ी मीर द्वारा
نالے کا آج دل سے پھر لب تلک گزر ہے
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जल्वा जो तेरे रुख़ का एहसास में ढल जाए
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جلوہ جو ترے رخ کا احساس میں ڈھل جائے
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ख़बर ही नहीं कैसे अंगड़ाई ले कर निगाहें उठाए कि साग़र उठाए
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
خبر ہی نہیں کیسے انگڑائی لے کر نگاہیں اٹھائے کہ ساغر اٹھائے
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लख़्त-ए-जिगर तो अपने यक लख़्त रो चुका था
मीर तक़ी मीर द्वारा
لخت جگر تو اپنے یک لخت رو چکا تھا
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जहाँ अब ख़ार-ज़ारें हो गई हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جہاں اب خار زاریں ہو گئی ہیں
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जो इस शोर से मीर रोता रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو اس شور سے میرؔ روتا رہے گا
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पल में जहाँ को देखते मेरे डुबो चुका
मीर तक़ी मीर द्वारा
پل میں جہاں کو دیکھتے میرے ڈبو چکا
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सोज़िश-ए-दिल से मुफ़्त गुलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
سوزش دل سے مفت گلتے ہیں
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हिज्राँ की कोफ़्त खेंचे बे-दम से हो चले हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہجراں کی کوفت کھینچے بے دم سے ہو چلے ہیں
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रात से आँसू मरी आँखों में फिर आने लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات سے آنسو مری آنکھوں میں پھر آنے لگا
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पलकों पे थे पार-ए-जिगर रात
मीर तक़ी मीर द्वारा
پلکوں پہ تھے پارۂ جگر رات
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हम इस गली का बड़ा एहतराम करते हैं
قمر جلالوی द्वारा
ہم اس گلی کا بڑا احترام کرتے ہیں
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मिज़्गान-ए-तर हूँ या रग-ए-ताक बुरीदा हूँ
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
مژگان تر ہوں یا رگ تاک بریدہ ہوں
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जोशिश-ए-अश्क से हूँ आठ पहर पानी में
मीर तक़ी मीर द्वारा
جوشش اشک سے ہوں آٹھ پہر پانی میں
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क्या कहें आतिश-ए-हिज्राँ से गले जाते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیں آتش ہجراں سے گلے جاتے ہیں
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अधर आ कर शिकार-अफ़गन हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر آ کر شکار افگن ہمارا
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न रुकते हैं आँसू न थमते हैं नाले
قمر جلالوی द्वारा
نہ رکتے ہیں آنسو نہ تھمتے ہیں نالے
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दश्त बे-आब की तरह गुज़री
Amjad Islam Amjad द्वारा
دشت بے آب کی طرح گزری
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मानिंद-ए-शम्अ-ए-मजलिस-ए-शब अश्कबार पाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
مانند شمع مجلس شب اشکبار پایا
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