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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
فیض احمد فیض द्वारा
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
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हसरत-ए-दीद में गुज़रां हैं ज़माने कब से
فیض احمد فیض द्वारा
حسرتِ دید میں گزراں ہیں زمانے کب سے
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दिल बहम पहुँचा बदन में तब से सारा तन जला
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل بہم پہنچا بدن میں تب سے سارا تن جلا
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आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
فیض احمد فیض द्वारा
آئے کچھ ابر کچھ شراب آئے
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वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
فیض احمد فیض द्वारा
وہ بتوں نے ڈالے ہیں وسوسے کہ دلوں سے خوف خدا گیا
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क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
فیض احمد فیض द्वारा
قرض نگاہ یار ادا کر چکے ہیں ہم
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हमें से अपनी नवा हम-कलाम होती रही
فیض احمد فیض द्वारा
ہمیں سے اپنی نوا ہم کلام ہوتی رہی
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हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी
فیض احمد فیض द्वारा
ہمت التجا نہیں باقی
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यह मौसम-ए-गुल गरचह तरब-ख़ेज़ बहुत है
فیض احمد فیض द्वारा
یہ موسم گل گرچہ طرب خیز بہت ہے
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दरबार में अब सतवत-ए-शाही की अलामत
فیض احمد فیض द्वारा
دربار میں اب سطوت شاہی کی علامت
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पाये ख़िताब क्या क्या देखे अताब क्या क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
پائے خطاب کیا کیا دیکھے عتاب کیا کیا
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सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
فیض احمد فیض द्वारा
ستم سکھلائے گا رسم وفا ایسے نہیں ہوتا
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ऐ तू कि रोज़ ओ शब को मह ओ आफ़ताब दे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اے تو کہ روز و شب کو مہ و آفتاب دے
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रमक़ एक जान वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رمق ایک جان وبال ہے کوئی دم جو ہے تو عذاب ہے
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गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
گئے موسم میں جو کھلتے تھے گلابوں کی طرح
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यादों का हिसाब रख रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
یادوں کا حساب رکھ رہا ہوں
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क्या ये आफ़त नहीं अज़ाब नहीं
जौन एलिया द्वारा
کیا یہ آفت نہیں عذاب نہیں
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हवास में तो न थे फिर भी क्या न कर आए
जौन एलिया द्वारा
حواس میں تو نہ تھے پھر بھی کیا نہ کر آئے
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ऐ कू-ए-यार तेरे ज़माने गुज़र गए
जौन एलिया द्वारा
اے کوئے یار تیرے زمانے گزر گئے
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