Mujh Soz Baad-e-Marg Se Aagah Kaun Hai
مجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंمجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
شمع مزار میر بجز آہ کون ہے
Mujh soz baad-e-marg se aagah kaun hai
Shama-e-mazaar-e-Mir bajuz aah kaun hai
मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
शम-ए-मज़ार-ए-मीर बजुज़ आह कौन है
بیکس ہوں مضطرب ہوں مسافر ہوں بے وطن
دوری راہ بن مرے ہم راہ کون ہے
Be-kas hun, muztarib hun, musafir hun, be-watan
Doori-e-raah bin mere hum-raah kaun hai
बे-कस हूँ, मुज़्तरिब हूँ, मुसाफ़िर हूँ, बे-वतन
दूरी-ए-राह बिन मिरे हम-राह कौन है
لبریز جس کے حسن سے مسجد ہے اور دیر
ایسا بتوں کے بیچ وہ اللہ کون ہے
Labrez jis ke husn se masjid hai aur dair
Aisa buton ke beech woh Allah kaun hai
लबरेज़ जिस के हुस्न से मस्जिद है और दैर
ऐसा बुतों के बीच वो अल्लाह कौन है

शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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