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कल मीर ने क्या क्या की मय के लिए बेताबी
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل میرؔ نے کیا کیا کی مے کے لیے بیتابی
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दहर भी 'मीर' तुर्फ़ा मक़्तल है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دہر بھی میرؔ طرفہ مقتل ہے
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अब ज़ोफ़ से ढहता है बेताबी शिताबि की
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب ضعف سے ڈھہتا ہے بیتابی شتابی کی
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एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है
जौन एलिया द्वारा
ایک ہی مژدہ صبح لاتی ہے
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ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या
Amjad Islam Amjad द्वारा
غبار دشت طلب میں ہیں رفتگاں کیا کیا
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हवाएँ लाख चलें लौ सँभलती रहती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
ہوائیں لاکھ چلیں لو سنبھلتی رہتی ہے
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आँखों से इक ख़्वाब गुज़रने वाला है
Amjad Islam Amjad द्वारा
آنکھوں سے اک خواب گزرنے والا ہے
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शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
شام ڈھلے جب بستی والے لوٹ کے گھر کو آتے ہیں
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तलवार ग़र्क़-ए-ख़ूँ है आँखें गुलाबियाँ हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
تلوار غرق خوں ہے آنکھیں گلابیاں ہیں
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दिल में भरा ज़ बसकि ख़याल-ए-शराब था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل میں بھرا ز بسکہ خیال شراب تھا
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बस्तियों में इक सदा-ए-बे-सदा रह जाएगी
Amjad Islam Amjad द्वारा
بستیوں میں اک صدائے بے صدا رہ جائے گی
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अर्ज़-ए-नाज़-ए-शोख़ी-ए-दंदाँ बराए-ख़ंदा है
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
عرض ناز شوخیٔ دنداں برائے خندہ ہے
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दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل عشق کا ہمیشہ حریف نبرد تھا
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हवा के ज़ोर से पिंदार-ए-बाम-ओ-दर भी गया
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہوا کے زور سے پندار بام و در بھی گیا
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किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है
Amjad Islam Amjad द्वारा
کسی کی آنکھ میں خود کو تلاش کرنا ہے
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दिल के दरिया को किसी रोज़ उतर जाना है
Amjad Islam Amjad द्वारा
دل کے دریا کو کسی روز اتر جانا ہے
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अपने होने की तब-ओ-ताब से बाहर न हुए
Amjad Islam Amjad द्वारा
اپنے ہونے کی تب و تاب سے باہر نہ ہوئے
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ज़िंदगानी जावदानी भी नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
زندگانی جاودانی بھی نہیں
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हर दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज-ए-करख़्त का
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہر دم طرف ہے ویسے مزاج کرخت کا
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शिकवा करूँ मैं कब तक उस अपने मेहरबाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
شکوہ کروں میں کب تک اس اپنے مہرباں کا
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