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ख़ंजर ब-कफ़ वो जब से सफ़्फ़ाक हो गया है
मीर तक़ी मीर द्वारा
خنجر بکف وہ جب سے سفاک ہو گیا ہے
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रमक़ एक जान वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رمق ایک جان وبال ہے کوئی دم جو ہے تو عذاب ہے
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किस हुस्न से कहूँ मैं उस की ख़ुश अख़्तरी की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کس حسن سے کہوں میں اس کی خوش اختری کی
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ज़बाँ रख ग़ुंचा सा अपने दहन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
زباں رکھ غنچہ ساں اپنے دہن میں
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बाहर गुज़ार दी कभी अंदर भी आएंगे
जौन एलिया द्वारा
باہر گزار دی کبھی اندر بھی آئیں گے
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दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
जौन एलिया द्वारा
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
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ये दर्द-ए-हिज्र और उस पर सहर नहीं होती
قمر جلالوی द्वारा
یہ درد ہجر اور اس پر سحر نہیں ہوتی
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जो क़ुर्बतों के नशे थे वो अब उतरने लगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو قربتوں کے نشے تھے وہ اب اترنے لگے
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दिल मुनाफ़िक़ था शब-ए-हिज्र में सोया कैसा
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل منافق تھا شب ہجر میں سویا کیسا
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दश्त बे-आब की तरह गुज़री
Amjad Islam Amjad द्वारा
دشت بے آب کی طرح گزری
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कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते
Amjad Islam Amjad द्वारा
کبھی رقص شام بہار میں اسے دیکھتے
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औरों का था बयान तो मौज-ए-सदा रहे
Amjad Islam Amjad द्वारा
اوروں کا تھا بیان تو موج صدا رہے
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बुरक़ा उठा था रुख़ से मिरे बद-गुमाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
برقع اٹھا تھا رخ سے مرے بد گمان کا
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सुख़न मुश्ताक़ है आलम हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
سخن مشتاق ہے عالم ہمارا
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मानिंद-ए-शम्अ-ए-मजलिस-ए-शब अश्कबार पाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
مانند شمع مجلس شب اشکبار پایا
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ग़ाफ़िल ब वहम-ए-नाज़ ख़ुद-आरा है वर्ना याँ
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
غافل بہ وہم ناز خود آرا ہے ورنہ یاں
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कल चमन में गुल-ओ-समन देखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل چمن میں گل و سمن دیکھا
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पुश्त-ए-पा मारी बस-कि दुनिया पर
मीर तक़ी मीर द्वारा
پشت پا ماری بسکہ دنیا پر
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दावे को यार आगे मयूब कर चुके हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
دعوے کو یار آگے معیوب کر چکے ہیں
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मुश्किल है होना रोकश रुख़्सार की झलक के
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشکل ہے ہونا روکش رخسار کی جھلک کے
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