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दर्द

सभी 123अशआर 0ग़ज़ल 123
ग़ज़ल123
क्या बुलबुल असीर है बे बाल-ओ-पर कि हम
کیا بلبل اسیر ہے بے بال و پر کہ ہم
रात से आँसू मरी आँखों में फिर आने लगा
رات سے آنسو مری آنکھوں میں پھر آنے لگا
पलकों पे थे पार-ए-जिगर रात
پلکوں پہ تھے پارۂ جگر رات
जुदा जो पहलू से वो दिलबर यगाना हुआ
جدا جو پہلو سے وہ دلبر یگانہ ہوا
ग़लत है इश्क़ में ऐ बुलहवस अंदेशा राहत का
غلط ہے عشق میں اے بوالہوس اندیشہ راحت کا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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