ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
फ़िराक़
सभी
154
अशआर
0
ग़ज़ल
154
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
तरस रहा हूँ मगर तू नज़र न आ मुझ को
अहमद फ़राज़ द्वारा
ترس رہا ہوں مگر تو نظر نہ آ مجھ کو
0
ये आलम-ए-शौक़ का देखा न जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ عالم شوق کا دیکھا نہ جائے
0
ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
0
हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم بھی پھرتے ہیں یک حشم لے کر
0
कब तक तू इम्तिहाँ में मुझ से जुदा रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تک تو امتحاں میں مجھ سے جدا رہے گا
0
वक़्त-ए-रुख़्सत आ गया दिल फिर भी घबराया नहीं
परवीन शाकिर द्वारा
وقت رخصت آ گیا دل پھر بھی گھبرایا نہیں
0
ये ग़नीमत है कि उन आँखों ने पहचाना हमें
परवीन शाकिर द्वारा
یہ غنیمت ہے کہ ان آنکھوں نے پہچانا ہمیں
0
गुफ़्तगू जब महाल की होगी
जौन एलिया द्वारा
گفتگو جب محال کی ہوگی
0
ज़िक्र भी उस से क्या भला मेरा
जौन एलिया द्वारा
ذکر بھی اس سے کیا بھلا میرا
0
बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं
जौन एलिया द्वारा
بڑا احسان ہم فرما رہے ہیں
0
सर ही अब फोड़िए नदामत में
जौन एलिया द्वारा
سر ہی اب پھوڑیے ندامت میں
0
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کے ہم بچھڑے تو شاید کبھی خوابوں میں ملیں
0
उन की तरफ़ से तर्क-ए-मुलाक़ात हो गई
قمر جلالوی द्वारा
ان کی طرف سے ترک ملاقات ہو گئی
0
जानां दिल का शहर नगर अफ़सोस का है
अहमद फ़राज़ द्वारा
جاناں دل کا شہر نگر افسوس کا ہے
0
लहू में तैरते फिरते मलाल से कुछ हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
لہو میں تیرتے پھرتے ملال سے کچھ ہیں
0
गुल-ओ-बुलबुल बहार में देखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل و بلبل بہار میں دیکھا
0
अश्क आँख में फिर अटक रहा है
परवीन शाकिर द्वारा
اشک آنکھ میں پھر اٹک رہا ہے
0
यह चश्म आईना-दार-ए-रू थी किसू की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ چشم آئینہ دار رو تھی کسو کی
0
दुख नोश्ता है तो आँधी को लिखा आहिस्ता
परवीन शाकिर द्वारा
دکھ نوشتہ ہے تو آندھی کو لکھا آہستہ
0
गई छाओं उस तेग़ की सर से जब की
मीर तक़ी मीर द्वारा
گئی چھاؤں اس تیغ کی سر سے جب کی
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें