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यूं बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
فیض احمد فیض द्वारा
یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد
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इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق ہمارے خیال پڑا ہے
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आए हैं मीर काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ کافر ہو کر خدا کے گھر میں
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ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
زخم جھیلے داغ بھی کھائے بہت
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आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ سحر نے سوزش دل کو مٹا دیا
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
मीर तक़ी मीर द्वारा
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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इश्क़ में ने ख़ौफ़-ओ-ख़तर चाहिए
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں نے خوف و خطر چاہیے
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क्या मैं भी परेशानी-ए-ख़ातिर से क़रीं था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا میں بھی پریشانیٔ خاطر سے قریں تھا
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तरे ग़म को जां की तलाश थी तरे जां-निसार चले गए
فیض احمد فیض द्वारा
ترے غم کو جاں کی تلاش تھی ترے جاں نثار چلے گئے
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क़ंद-ए-दहन
فیض احمد فیض द्वारा
قند دہن
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कुछ दिन से इंतज़ार-ए-सवाल-ए-दीगर में है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ دن سے انتظار سوال دگر میں ہے
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क़ुर्ब-ए-जानां का न मयख़ाने का मौसम आया
अहमद फ़राज़ द्वारा
قرب جاناں کا نہ مے خانے کا موسم آیا
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हमारे आगे तिरा जब कसू ने नाम लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہمارے آگے ترا جب کسو نے نام لیا
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पीरी में क्या जवानी के मौसम को रोइये
मीर तक़ी मीर द्वारा
پیری میں کیا جوانی کے موسم کو روئیے
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मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़साँ सख़्ता जाँ हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
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आज यूं मौज दर मौज ग़म थम गया
فیض احمد فیض द्वारा
آج یوں موج در موج غم تھم گیا
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अंधेरे लाख छा जाएँ उजाला कम नहीं होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اندھیرے لاکھ چھا جائیں اجالا کم نہیں ہوتا
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इश्क़ में ज़िल्लत हुई ख़िफ़्फ़त हुई तोहमत हुई
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں ذلت ہوئی خفت ہوئی تہمت ہوئی
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आरज़ूएं हज़ार रखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
آرزوئیں ہزار رکھتے ہیں
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आए हैं मीरؔ मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ منہ کو بنائے خفا سے آج
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