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दिल बदन का शरीक-ए-हाल कहाँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل بدن کا شریک حال کہاں
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इश्क़ नशा है न जादू जो उतर भी जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
عشق نشہ ہے نہ جادو جو اتر بھی جائے
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ये मैं भी क्या हूँ उसे भूल कर उसी का रहा
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ میں بھی کیا ہوں اسے بھول کر اسی کا رہا
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रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہتا ہے ہڈیوں سے مری جو ہما لگا
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चल निकलती हैं ग़म-ए-यार से बातें क्या क्या
अहमद फ़राज़ द्वारा
چل نکلتی ہیں غم یار سے باتیں کیا کیا
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जिस से ये तबीयत बड़ी मुश्किल से लगी थी
अहमद फ़राज़ द्वारा
جس سے یہ طبیعت بڑی مشکل سے لگی تھی
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मर रहते जो गुल बन तो सारा यह ख़लल जाता
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر رہتے جو گل بن تو سارا یہ خلل جاتا
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अब तो मुँह से बोल मुझ को देख दिन भर हो गया
قمر جلالوی द्वारा
اب تو منہ سے بول مجھ کو دیکھ دن بھر ہو گیا
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