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शिकवा करूँ मैं कब तक उस अपने मेहरबाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
شکوہ کروں میں کب تک اس اپنے مہرباں کا
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कहे है कोह-कन कर फ़िक्र मेरी ख़स्ता-हाली में
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہے ہے کوہ کن کر فکر میری خستہ حالی میں
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निकले है जिंस-ए-हुस्न किसी कारवाँ में
मीर तक़ी मीर द्वारा
نکلے ہے جنس حسن کسی کاروان میں
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क्या क्या बैठे बिगड़ बिगड़ तुम पर हम तुम से बनाए गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کیا بیٹھے بگڑ بگڑ تم پر ہم تم سے بنائے گئے
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दिल बर्बाद को आबाद किया है मैंने
जौन एलिया द्वारा
دل برباد کو آباد کیا ہے میں نے
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जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو تو ہی صنم ہم سے بے زار ہوگا
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राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
فیض احمد فیض द्वारा
راز الفت چھپا کے دیکھ لیا
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ग़म ब-दिल शुक्र ब-लब मस्त-ओ-ग़ज़ल ख़्वाँ चलिए
فیض احمد فیض द्वारा
غم بہ دل شکر بہ لب مست و غزل خواں چلیے
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रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
روگ ایسے بھی غم یار سے لگ جاتے ہیں
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तुम में जो बात है वो बात नहीं आई है
قمر جلالوی द्वारा
تم میں جو بات ہے وہ بات نہیں آئی ہے
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नहीं कि नामा-बरों को तलाश करते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہیں کہ نامہ بروں کو تلاش کرتے ہیں
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मुवा मैं सजदे में पर नक़्श मेरा बार रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
موا میں سجدے میں پر نقش میرا بار رہا
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अफ़सोस कि दंदाँ का किया रिज़्क़ फ़लक ने
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
افسوس کہ دنداں کا کیا رزق فلک نے
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हर एक बात न क्यों ज़हर सी हमारी लगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر ایک بات نہ کیوں زہر سی ہماری لگے
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सजदे तेरे कहने से मैं कर लूँ भी तो क्या हो
قمر جلالوی द्वारा
سجدے ترے کہنے سے میں کر لوں بھی تو کیا ہو
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कौन से थे वो तुम्हारे अहद जो टूटे न थे
قمر جلالوی द्वारा
کون سے تھے وہ تمہارے عہد جو ٹوٹے نہ تھے
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तौबा कीजे अब फ़रेब-ए-दोस्ती खाएंगे क्या
قمر جلالوی द्वारा
توبہ کیجے اب فریب دوستی کھائیں گے کیا
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बैठे थे लोग पहलू ब पहलू पिए हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
بیٹھے تھے لوگ پہلو بہ پہلو پیے ہوئے
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सूए फ़लक न जानिब-ए-महताब देखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
سوئے فلک نہ جانب مہتاب دیکھنا
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रात के पिछले पहर रोने के आदी रोए
अहमद फ़राज़ द्वारा
رات کے پچھلے پہر رونے کے عادی روئے
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