ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
ग़म
सभी
204
अशआर
0
ग़ज़ल
204
ग़ज़ल
204
0
सुना है हाल तिरे कुश्तगाँ बेचारों का
سنا ہے حال ترے کشتگاں بیچاروں کا
0
है बज़्म-ए-बुताँ में सुख़न आज़ुर्दा लबों से
ہے بزم بتاں میں سخن آزردہ لبوں سے
0
कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
0
तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
تیرا گھر اور میرا جنگل بھیگتا ہے ساتھ ساتھ
0
वह मजबूरी नहीं थी यह अदाकारी नहीं है
وہ مجبوری نہیں تھی یہ اداکاری نہیں ہے
सभी देखें
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें