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ये ग़म क्या दिल की आदत है, नहीं तो
जौन एलिया द्वारा
یہ غم کیا دل کی عادت ہے نہیں تو
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रही निगुफ़्ता मेरे दिल में दास्तान मेरी
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہی نگفتہ مرے دل میں داستاں میری
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छाती जला करे है सोज़-ए-दरूँ बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھاتی جلا کرے ہے سوز دروں بلا ہے
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शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
شعر کے پردے میں میں نے غم سنایا ہے بہت
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सह्ल यूं राह-ए-ज़िंदगी की है
فیض احمد فیض द्वारा
سہل یوں راہ زندگی کی ہے
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इश्क़ में कुछ नहीं दवा से नफ़ा
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں کچھ نہیں دوا سے نفع
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झुमके दिखा के तूर को जिन ने जला दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
جھمکے دکھا کے طور کو جن نے جلا دیا
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आगे हमारे अहद से वहशत को जा न थी
मीर तक़ी मीर द्वारा
آگے ہمارے عہد سے وحشت کو جا نہ تھی
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दिल-ओ-दिमाग़ है अब किस को ज़िंदगानी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل و دماغ ہے اب کس کو زندگانی کا
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हैं बाद मिरे मर्ग के आसार से अब तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہیں بعد مرے مرگ کے آثار سے اب تک
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गनवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैंने
जौन एलिया द्वारा
گنوائی کس کی تمنا میں زندگی میں نے
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हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइये
जौन एलिया द्वारा
ہجر کی آنکھوں سے آنکھیں تو ملاتے جائیے
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अमीरों तक रसाई हो चुकी बस
मीर तक़ी मीर द्वारा
امیروں تک رسائی ہو چکی بس
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सुरख़ियां क्यों ढूंढ कर लाऊं फ़साने के लिए
قمر جلالوی द्वारा
سرخیاں کیوں ڈھونڈھ کر لاؤں فسانے کے لئے
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हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم بھی پھرتے ہیں یک حشم لے کر
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लख़्त-ए-जिगर तो अपने यक लख़्त रो चुका था
मीर तक़ी मीर द्वारा
لخت جگر تو اپنے یک لخت رو چکا تھا
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क्या कहूँ कैसा सितम ग़फ़लत से मुझ पर हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہوں کیسا ستم غفلت سے مجھ پر ہو گیا
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जहाँ अब ख़ार-ज़ारें हो गई हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جہاں اب خار زاریں ہو گئی ہیں
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मुस्तौजिब-ए-ज़ुल्म-ओ-सितम-ओ-जौर-ओ-जफ़ा हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مستوجب ظلم و ستم و جور و جفا ہوں
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वहशत थी हमें भी वही घर बार से अब तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
وحشت تھی ہمیں بھی وہی گھر بار سے اب تک
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