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मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
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कसरत-ए-दाग़ से दिल रश्क-ए-गुलिस्ताँ न हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کثرت داغ سے دل رشک گلستاں نہ ہوا
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बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से
मीर तक़ी मीर द्वारा
بیتابیوں میں تنگ ہم آئے ہیں جان سے
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सोज़िश-ए-दिल से मुफ़्त गुलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
سوزش دل سے مفت گلتے ہیں
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हिज्राँ की कोफ़्त खेंचे बे-दम से हो चले हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہجراں کی کوفت کھینچے بے دم سے ہو چلے ہیں
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जौन एलिया द्वारा
کتنے عیش سے رہتے ہوں گے کتنے اتراتے ہوں گے
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क्या मिरे आने पे तू ऐ बुत-ए-मग़रूर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا مرے آنے پہ تو اے بت مغرور گیا
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न गया ख़याल-ए-ज़ुल्फ़-ए-सियह-ए-जफ़ा-शिआ'रां
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ گیا خیال زلف سیہ جفا شعاراں
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मशहूर हैं दिलों की मिरे बे-क़रारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور ہیں دلوں کی مرے بے قراریاں
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अंदोह से हुई न रिहाई तमाम शब
मीर तक़ी मीर द्वारा
اندوہ سے ہوئی نہ رہائی تمام شب
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हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया
परवीन शाकिर द्वारा
ہم نے ہی لوٹنے کا ارادہ نہیں کیا
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अब मीरؔ जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب میرؔ جی تو اچھے زندیق ہی بن بیٹھے
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वाँ वो तो घर से अपने पी कर शराब निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
واں وہ تو گھر سے اپنے پی کر شراب نکلا
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यूँ ही हैरान-ओ-ख़फ़ा जूँ ग़ुंचा-ए-तस्वीर हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
یوں ہی حیران و خفا جوں غنچۂ تصویر ہوں
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अर्ज़-ए-नाज़-ए-शोख़ी-ए-दंदाँ बराए-ख़ंदा है
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
عرض ناز شوخیٔ دنداں برائے خندہ ہے
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रुकने का समय गुज़र गया है
परवीन शाकिर द्वारा
رکنے کا سمے گزر گیا ہے
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नहीं वसवस जी गँवाने के
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہیں وسواس جی گنوانے کے
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चारा-साज़ों की अज़ीयत नहीं देखी जाती
परवीन शाकिर द्वारा
چارہ سازوں کی اذیت نہیں دیکھی جاتی
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जगा सके न तिरे लब लकीर ऐसी थी
परवीन शाकिर द्वारा
جگا سکے نہ ترے لب لکیر ایسی تھی
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आँखों से मेरी कौन मिरे ख़्वाब ले गया
परवीन शाकिर द्वारा
آنکھوں سے میری کون مرے خواب لے گیا
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