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ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
غم دنیا سے گر پائی بھی فرصت سر اٹھانے کی
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फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
پھر مجھے دیدۂ تر یاد آیا
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अब भला छोड़ के घर क्या करते
परवीन शाकिर द्वारा
اب بھلا چھوڑ کے گھر کیا کرتے
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कब से नज़र लगी थी दरवाज़-ए-हरम से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب سے نظر لگی تھی دروازۂ حرم سے
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जुज़ जुर्म-ए-इश्क़ कोई भी साबित किया गुनाह
मीर तक़ी मीर द्वारा
جز جرم عشق کوئی بھی ثابت کیا گناہ
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दिल पुर ख़ूँ है यहाँ तुझ को गुमाँ है शीशा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل پر خوں ہے یہاں تجھ کو گماں ہے شیشہ
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हमें आमद-ए-मीर कल भा गई
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہمیں آمد میرؔ کل بھا گئی
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ख़ुश न आई तुम्हारी चाल हमें
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش نہ آئی تمہاری چال ہمیں
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ख़राबी कुछ न पूछो मिल्कत-ए-दिल की इमारत की
मीर तक़ी मीर द्वारा
خرابی کچھ نہ پوچھو ملکت دل کی عمارت کی
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बे रो-ए-ओ-ज़ुल्फ़-ए-यार है रोने से काम याँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے روے و زلف یار ہے رونے سے کام یاں
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ज़िंदगी क्या है इक कहानी है
जौन एलिया द्वारा
زندگی کیا ہے اک کہانی ہے
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किसी से कोई ख़फ़ा भी नहीं रहा अब तो
जौन एलिया द्वारा
کسی سے کوئی خفا بھی نہیں رہا اب تو
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वो क्या कुछ न करने वाले थे
जौन एलिया द्वारा
وہ کیا کچھ نہ کرنے والے تھے
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मसनद-ए-ग़म पे जच रहा हूँ मैं
जौन एलिया द्वारा
مسند غم پہ جچ رہا ہوں میں
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शाम थी और बर्ग-ओ-गुल शल थे मगर सबा भी थी
जौन एलिया द्वारा
شام تھی اور برگ و گل شل تھے مگر صبا بھی تھی
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ख़ुद से रिश्ते रहे कहाँ उनके
जौन एलिया द्वारा
خود سے رشتے رہے کہاں ان کے
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तश्हीर अपने दर्द की हर सू कराइए
Amjad Islam Amjad द्वारा
تشہیر اپنے درد کی ہر سو کرائیے
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क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
قتل عاشق کسی معشوق سے کچھ دور نہ تھا
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फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ में सैर जो की हमने जाए-गुल
मीर तक़ी मीर द्वारा
فصل خزاں میں سیر جو کی ہم نے جائے گل
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मोहब्बत का जब रोज़ बाज़ार होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
محبت کا جب روز بازار ہوگا
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