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दौलत-ए-दहर सब लुटाई है
जौन एलिया द्वारा
دولت دہر سب لٹائی ہے
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नाम ही क्या निशाँ ही क्या ख़्वाब-ओ-ख़याल हो गए
जौन एलिया द्वारा
نام ہی کیا نشاں ہی کیا خواب و خیال ہو گئے
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शौक़ का रंग बुझ गया याद के ज़ख़्म भर गए
जौन एलिया द्वारा
شوق کا رنگ بجھ گیا یاد کے زخم بھر گئے
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आप अपना ग़ुबार थे हम तो
जौन एलिया द्वारा
آپ اپنا غبار تھے ہم تو
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कैसा दिल और उस के क्या ग़म जी
जौन एलिया द्वारा
کیسا دل اور اس کے کیا غم جی
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गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं
जौन एलिया द्वारा
گزراں ہیں گزرتے رہتے ہیں
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न हम रहे न वो ख़्वाबों की ज़िंदगी ही रही
जौन एलिया द्वारा
نہ ہم رہے نہ وہ خوابوں کی زندگی ہی رہی
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ख़्वाब की हालतों के साथ तेरी हिकायतों में हैं
जौन एलिया द्वारा
خواب کی حالتوں کے ساتھ تیری حکایتوں میں ہیں
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ये तबीअत है तो ख़ुद आज़ार बन जाएँगे हम
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ طبیعت ہے تو خود آزار بن جائیں گے ہم
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दिल में अब ताक़त कहाँ ख़ूँ नाबा अफ़शानी करे
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل میں اب طاقت کہاں خوں نابہ افشانی کرے
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चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
چمن میں صبح یہ کہتی تھی ہو کر چشم تر شبنم
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जग में कोई न टुक हँसा होगा
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
جگ میں کوئی نہ ٹک ہنسا ہوگا
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पैग़ाम ग़म जिगर का गुलज़ार तक न पहुँचा
मीर तक़ी मीर द्वारा
پیغام غم جگر کا گلزار تک نہ پہنچا
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अब के भी सैर-ए-बाग़ की जी में हवस रही
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب کے بھی سیر باغ کی جی میں ہوس رہی
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बंद क़बा को ख़ूबाँ जिस वक़्त वा करेंगे
मीर तक़ी मीर द्वारा
بند قبا کو خوباں جس وقت وا کریں گے
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गर्मी से मैं तो आतिश-ए-ग़म की पिघल गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرمی سے میں تو آتش غم کی پگھل گیا
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कई दिन सुलूक-ए-विदाअ का मिरे दर-पय-ए-दिल-ए-ज़ार था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کئی دن سلوک وداع کا مرے درپے دل زار تھا
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न किसी से पास मेरे यार का आना गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نا کسی سے پاس میرے یار کا آنا گیا
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ऐ अब्र-ए-तर तू और किसी सिम्त को बरस
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے ابر تر تو اور کسی سمت کو برس
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ऐसा तिरा रह गुज़र न होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ایسا ترا رہ گزر نہ ہوگا
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