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दोनों हैं उन के हिज्र का हासिल लिये हुए
قمر جلالوی द्वारा
دونوں ہیں ان کے ہجر کا حاصل لئے ہوئے
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सैर कर अंदलीब का अहवाल
मीर तक़ी मीर द्वारा
سیر کر عندلیب کا احوال
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फिर मिरे शहर से गुज़रा है वो बादल की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
پھر مرے شہر سے گزرا ہے وہ بادل کی طرح
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हिज्राँ की कोफ़्त खेंचे बे-दम से हो चले हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہجراں کی کوفت کھینچے بے دم سے ہو چلے ہیں
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उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس نے سکوت شب میں بھی اپنا پیام رکھ دیا
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सवाल छोड़ कि हालत ये क्यों बनाई है
قمر جلالوی द्वारा
سوال چھوڑ کہ حالت یہ کیوں بنائی ہے
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जब हर एक शहर बलाओं का ठिकाना बन जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب ہر اک شہر بلاؤں کا ٹھکانہ بن جائے
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तू नहीं तेरा इस्तिआरा नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
تو نہیں تیرا استعارا نہیں
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क्या मिरे आने पे तू ऐ बुत-ए-मग़रूर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا مرے آنے پہ تو اے بت مغرور گیا
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न गया ख़याल-ए-ज़ुल्फ़-ए-सियह-ए-जफ़ा-शिआ'रां
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ گیا خیال زلف سیہ جفا شعاراں
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गुल शर्म से बह जाएगा गुलशन में हो कर आब सा
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل شرم سے بہہ جائے گا گلشن میں ہو کر آب سا
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अंदोह से हुई न रिहाई तमाम शब
मीर तक़ी मीर द्वारा
اندوہ سے ہوئی نہ رہائی تمام شب
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ख़ुशी की बात है या दुख का मंज़र देख सकती हूँ
परवीन शाकिर द्वारा
خوشی کی بات ہے یا دکھ کا منظر دیکھ سکتی ہوں
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रात से आँसू मरी आँखों में फिर आने लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات سے آنسو مری آنکھوں میں پھر آنے لگا
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पलकों पे थे पार-ए-जिगर रात
मीर तक़ी मीर द्वारा
پلکوں پہ تھے پارۂ جگر رات
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जुदा जो पहलू से वो दिलबर यगाना हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
جدا جو پہلو سے وہ دلبر یگانہ ہوا
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हो आजिज़ कि जिस्म इस क़दर ज़ोर से
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہو عاجز کہ جسم اس قدر زور سے
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अब वो घर इक वीराना था बस वीराना ज़िंदा था
जौन एलिया द्वारा
اب وہ گھر اک ویرانہ تھا بس ویرانہ زندہ تھا
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चलो बाद-ए-बहारी जा रही है
जौन एलिया द्वारा
چلو باد بہاری جا رہی ہے
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करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کروں نہ یاد مگر کس طرح بھلاؤں اسے
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