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उन के जाते ही यह वहशत का असर देखा किये
قمر جلالوی द्वारा
ان کے جاتے ہی یہ وحشت کا اثر دیکھا کئے
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कभी जो आँख पे गेसू-ए-यार होता है
قمر جلالوی द्वारा
کبھی جو آنکھ پہ گیسوئے یار ہوتا ہے
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अब क्या सोचें क्या हालात थे किस कारन ये ज़हर पिया है
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کیا سوچیں کیا حالات تھے کس کارن یہ زہر پیا ہے
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कहा था किस ने कि अहद-ए-वफ़ा करो उस से
अहमद फ़राज़ द्वारा
کہا تھا کس نے کہ عہد وفا کرو اس سے
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कल शब-ए-हिज्राँ थी लब पर नाला-ए-बीमाराना था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل شب ہجراں تھی لب پر نالہ بیمارانہ تھا
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दिल के तईं आतिश-ए-हिज्राँ से बचाया न गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کے تیں آتش ہجراں سے بچایا نہ گیا
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शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले
परवीन शाकिर द्वारा
شام آئی تری یادوں کے ستارے نکلے
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गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
گئے موسم میں جو کھلتے تھے گلابوں کی طرح
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क्या कहें आतिश-ए-हिज्राँ से गले जाते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیں آتش ہجراں سے گلے جاتے ہیں
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कहीं पहुँचो भी मुझ बे-पा-ओ-सर तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہیں پہنچو بھی مجھ بے پا و سر تک
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मैं भी दुनिया में हूँ इक नाला-ए-परेशाँ यक जा
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں بھی دنیا میں ہوں اک نالہ پریشاں یک جا
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तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो
जौन एलिया द्वारा
تمہارا ہجر منا لوں اگر اجازت ہو
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ये दर्द-ए-हिज्र और उस पर सहर नहीं होती
قمر جلالوی द्वारा
یہ درد ہجر اور اس پر سحر نہیں ہوتی
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तेरा क़ुर्ब था कि फ़िराक़ था वही तेरी जल्वा-गरी रही
अहमद फ़राज़ द्वारा
ترا قرب تھا کہ فراق تھا وہی تیری جلوہ گری رہی
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जब यार ने रख़्त-ए-सफ़र बाँधा
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب یار نے رخت سفر باندھا
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हम तो ख़ुश थे कि चलो दिल का जुनूँ कुछ कम है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم تو خوش تھے کہ چلو دل کا جنوں کچھ کم ہے
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दिल मुनाफ़िक़ था शब-ए-हिज्र में सोया कैसा
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل منافق تھا شب ہجر میں سویا کیسا
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रात में इस कशमकश में एक पल सोया नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
رات میں اس کشمکش میں ایک پل سویا نہیں
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दश्त बे-आब की तरह गुज़री
Amjad Islam Amjad द्वारा
دشت بے آب کی طرح گزری
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एक आज़ार हुई जाती है शोहरत हम को
Amjad Islam Amjad द्वारा
ایک آزار ہوئی جاتی ہے شہرت ہم کو
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