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सभी 228अशआर 0ग़ज़ल 228
ग़ज़ल228
जिन के लिए अपने तो यूँ जान निकलते हैं
جن کے لیے اپنے تو یوں جان نکلتے ہیں
वह और होंगे जिन को हरम की तलाश है
وہ اور ہوں گے جن کو حرم کی تلاش ہے
मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलैख़ा तपाक चाहता है
مثال دست زلیخا تپاک چاہتا ہے
कहाँ तक ग़ैर जासूसी के लेने को लगा आवे
کہاں تک غیر جاسوسی کے لینے کو لگا آوے
जराहत तोहफ़ा, अलमास अरमग़ां, दाग़-ए-जिगर हदिया
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ
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