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सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
ستم سکھلائے گا رسم وفا ایسے نہیں ہوتا
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कभी जो आँख पे गेसू-ए-यार होता है
کبھی جو آنکھ پہ گیسوئے یار ہوتا ہے
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जिस्म शोला है जभी जामा-ए-सादा पहना
جسم شعلہ ہے جبھی جامۂ سادہ پہنا
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पस्पा हुई सिपाह तो परचम भी हम ही थे
پسپا ہوئی سپاہ تو پرچم بھی ہم ہی تھے
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अपने होने की तब-ओ-ताब से बाहर न हुए
اپنے ہونے کی تب و تاب سے باہر نہ ہوئے
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