Aankh Se Door Na Ho Dil Se Utar Jayega
آنکھ سے دور نہ ہو دل سے اتر جائے گا
आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंآنکھ سے دور نہ ہو دل سے اتر جائے گا
وقت کا کیا ہے گزرتا ہے گزر جائے گا
Aankh se door na ho dil se utar jayega
Waqt ka kya hai guzarta hai guzar jayega
आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
اتنا مانوس نہ ہو خلوت غم سے اپنی
تو کبھی خود کو بھی دیکھے گا تو ڈر جائے گا
Itna maanoos na ho khalwat-e-gham se apni
Too kabhi khud ko bhi dekhega to dar jayega
इतना मानूस न हो ख़ल्वत-ए-ग़म से अपनी
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा
ڈوبتے ڈوبتے کشتی کو اچھالا دے دوں
میں نہیں کوئی تو ساحل پہ اتر جائے گا
Doobte doobte kashti ko uchhala de doon
Main nahin koi to saahil pe utar jayega
डूबते डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ
मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा

अहमद फ़राज़ जदीद उर्दू ग़ज़ल के सबसे मक़बूल रूमानी शायर हैं, जिन्होंने अपनी शायरी में क्लासिकी रिवायत और जदीद खयालात को मिलाया, और तानाशाही के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की।
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