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रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम
فیض احمد فیض द्वारा
رنگ پیراہن کا خوشبو زلف لہرانے کا نام
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अब कैसे रफ़ू पैराहन हो इस आवारा दीवाने का
قمر جلالوی द्वारा
اب کیسے رفو پیراہن ہو اس آوارہ دیوانے کا
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कल बारे हम से उस से मुलाक़ात हो गई
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل بارے ہم سے اس سے ملاقات ہو گئی
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करते ही नहीं तर्क-ए-बुताँ तौर-ए-जफ़ा का
मीर तक़ी मीर द्वारा
کرتے ہی نہیں ترک بتاں طور جفا کا
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बाहोश वही हैं दीवाने उल्फ़त में जो ऐसा करते हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
باہوش وہی ہیں دیوانے الفت میں جو ایسا کرتے ہیں
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हर जज़्र-ओ-मद से दस्त-ओ-बग़ल उठते हैं ख़रोश
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہر جزر و مد سے دست و بغل اٹھتے ہیں خروش
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आशिक़ी में मीर जैसे ख़्वाब मत देखा करो
अहमद फ़राज़ द्वारा
عاشقی میں میرؔ جیسے خواب مت دیکھا کرو
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न जाओ घर अभी तो रात है बादल भी काले हैं
قمر جلالوی द्वारा
نہ جاؤ گھر ابھی تو رات ہے بادل بھی کالے ہیں
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हवा शब को अबस मय के लिए जाना तो क्या होगा
قمر جلالوی द्वारा
ہوا شب کو عبث مے کے لئے جانا تو کیا ہوگا
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हम इस गली का बड़ा एहतराम करते हैं
قمر جلالوی द्वारा
ہم اس گلی کا بڑا احترام کرتے ہیں
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कल हम ने बज़्म-ए-यार में क्या क्या शराब पी
अहमद फ़राज़ द्वारा
کل ہم نے بزم یار میں کیا کیا شراب پی
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नाला-ए-अज्ज़ नक़्स-ए-उल्फ़त है
मीर तक़ी मीर द्वारा
نالۂ عجز نقص الفت ہے
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रमक़ एक जान वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رمق ایک جان وبال ہے کوئی دم جو ہے تو عذاب ہے
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मैं और बज़्म-ए-मय से यूँ तिश्ना-काम आऊँ
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
میں اور بزم مے سے یوں تشنہ کام آؤں
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है बज़्म-ए-बुताँ में सुख़न आज़ुर्दा लबों से
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
ہے بزم بتاں میں سخن آزردہ لبوں سے
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पुश्त-ए-पा मारी बस-कि दुनिया पर
मीर तक़ी मीर द्वारा
پشت پا ماری بسکہ دنیا پر
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शैख़ जी आओ मुसल्ला गिरवी जाम करो
मीर तक़ी मीर द्वारा
شیخ جی آؤ مصلیٰ گرو جام کرو
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नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था
मीर तक़ी मीर द्वारा
نئی طرزوں سے میخانے میں رنگ مے جھلکتا تھا
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राज़-ए-दिल क्यों न कहूँ सामने दीवानों के
قمر جلالوی द्वारा
راز دل کیوں نہ کہوں سامنے دیوانوں کے
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बैठे थे लोग पहलू ब पहलू पिए हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
بیٹھے تھے لوگ پہلو بہ پہلو پیے ہوئے
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