Ho Gayi Shehar Shehar Ruswaai
ہو گئی شہر شہر رسوائی
हो गई शहर शहर रुसवाई
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंیک بیاباں برنگ صوت جرس
مجھ پہ ہے بیکسی و تنہائی
Ik biyabaan ba-rang-e-saut-e-jaras
Mujh pe hai be-kasi-o-tanhai
इक बियाबां ब-रंग-ए-सौत-ए-जिरस
मुझ पे है बेकसी-ओ-तन्हाई
نہ کھنچے تجھ سے ایک جا نقاش
اس کی تصویر وہ ہے ہرجائی

मीर तक़ी मीर1723–1810
शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
पूरी प्रोफ़ाइल देखें →


तब्सिरे
तब्सिरे लोड हो रहे हैं…
अभी कोई तब्सिरा नहीं — सबसे पहले अपनी राय दें।