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होती है गरचह कहने से यारो पराई बात
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہوتی ہے گرچہ کہنے سے یارو پرائی بات
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जो ग़ैर थे वो इसी बात पर हमारे हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو غیر تھے وہ اسی بات پر ہمارے ہوئے
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है किस क़दर हलाक-ए-फ़रेब-ए-वफ़ा-ए-गुल
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
ہے کس قدر ہلاک فریب وفائے گل
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बला से हो शाम की सियाही कहीं तो मंज़िल मरी मिलेगी
قمر جلالوی द्वारा
بلا سے ہو شام کی سیاہی کہیں تو منزل مری ملے گی
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कहाँ तक ग़ैर जासूसी के लेने को लगा आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہاں تک غیر جاسوسی کے لینے کو لگا آوے
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करते भी क्या हुज़ूर न जब अपने घर मिले
قمر جلالوی द्वारा
کرتے بھی کیا حضور نہ جب اپنے گھر ملے
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ग़ैर ने हम को ज़बह किया ने ताक़त है ने यारा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
غیر نے ہم کو ذبح کیا نے طاقت ہے نے یارا ہے
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ख़ूबी का उस की बसके तलबगार हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوبی کا اس کی بسکہ طلب گار ہو گیا
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मौसम-ए-गुल आया है यारो कुछ मेरी तदबीर करो
मीर तक़ी मीर द्वारा
موسم گل آیا ہے یارو کچھ میری تدبیر کرو
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ग़म ब-दिल शुक्र ब-लब मस्त-ओ-ग़ज़ल ख़्वाँ चलिए
فیض احمد فیض द्वारा
غم بہ دل شکر بہ لب مست و غزل خواں چلیے
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ग़ैरों से मिल चले तुम मस्त शराब हो कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
غیروں سے مل چلے تم مست شراب ہو کر
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खोवें हैं नींद मेरी मुसीबत बयानियां
मीर तक़ी मीर द्वारा
کھوویں ہیں نیند میری مصیبت بیانیاں
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रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہتا ہے ہڈیوں سے مری جو ہما لگا
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क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब था
परवीन शाकिर द्वारा
قدموں میں بھی تکان تھی گھر بھی قریب تھا
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हँसते हो रोते देख कर ग़म से
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہنستے ہو روتے دیکھ کر غم سے
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