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ताना ज़न था हर कोई हम पर दिल-ए-नादाँ समेत
अहमद फ़राज़ द्वारा
طعنہ زن تھا ہر کوئی ہم پر دل ناداں سمیت
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शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
فیض احمد فیض द्वारा
شفق کی راکھ میں جل بجھ گیا ستارۂ شام
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अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب اور کیا کسی سے مراسم بڑھائیں ہم
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आह जिस वक़्त सर उठाती है
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ جس وقت سر اٹھاتی ہے
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न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतज़ार कोई तो हो
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ حریف جاں نہ شریک غم شب انتظار کوئی تو ہو
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कब मेरा नशीमन अहल-ए-चमन गुलशन में गवारा करते हैं
قمر جلالوی द्वारा
کب میرا نشیمن اہل چمن گلشن میں گوارا کرتے ہیں
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आह को समझे हो क्या दिल से अगर हो जाएगी
قمر جلالوی द्वारा
آہ کو سمجھے ہو کیا دل سے اگر ہو جائے گی
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याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब
فیض احمد فیض द्वारा
یاد کا پھر کوئی دروازہ کھلا آخر شب
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तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है
فیض احمد فیض द्वारा
تری امید ترا انتظار جب سے ہے
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ये रस्ते में किस से मुलाक़ात कर ली
قمر جلالوی द्वारा
یہ رستے میں کس سے ملاقات کر لی
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खुद को तरें मयार से घट कर नहीं देखा
अहमद फ़राज़ द्वारा
خود کو ترے معیار سے گھٹ کر نہیں دیکھا
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उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس نے سکوت شب میں بھی اپنا پیام رکھ دیا
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किसी सूरत सहर नहीं होती
قمر جلالوی द्वारा
کسی صورت سحر نہیں ہوتی
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करेंगे शिक्व-ए-जौर-ओ-जफ़ा दिल खोल कर अपना
قمر جلالوی द्वारा
کریں گے شکوۂ جور و جفا دل کھول کر اپنا
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ये दर्द-ए-हिज्र और उस पर सहर नहीं होती
قمر جلالوی द्वारा
یہ درد ہجر اور اس پر سحر نہیں ہوتی
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