Aah Jis Waqt Sar Uthati Hai

آہ جس وقت سر اٹھاتی ہے

आह जिस वक़्त सर उठाती है

ग़ज़ल

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آہ جس وقت سر اٹھاتی ہے
عرش پر برچھیاں چلاتی ہے

Aah jis waqt sar uthati hai
Arsh par barchhiyan chalati hai

आह जिस वक़्त सर उठाती है
अर्श पर बरछियाँ चलाती है

ناز بردار لب ہے جاں جب سے
تیرے خط کی خبر کو پاتی ہے

Naaz bardar lab hai jaan jab se
Tere khat ki khabar ko pati hai

नाज़ बरदार लब है जाँ जब से
तेरे ख़त की ख़बर को पाती है

اے شب ہجر راست کہہ تجھ کو
بات کچھ صبح کی بھی آتی ہے

Ae shab-e-hijr raast keh tujh ko
Baat kuch subah ki bhi aati hai

ऐ शब-ए-हिज्र रास्त कह तुझ को
बात कुछ सुबह की भी आती है

چشم بددور چشم تر اے میرؔ
آنکھیں طوفان کو دکھاتی ہے

Chashm-e-bad-door chashm-e-tar ae Meer
Aankhen toofan ko dikhati hai

चश्म-ए-बद-दूर चश्म-ए-तर ऐ मीर
आँखें तूफ़ान को दिखाती है


मीर तक़ी मीर

शास्त्रीय

मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।

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