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न फिर रखेंगे तेरी रह में पा हम
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ پھر رکھیں گے تیری رہ میں پا ہم
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जो मैं न हूँ तो करो तर्क नाज़ करने को
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو میں نہ ہوں تو کرو ترک ناز کرنے کو
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रफ़्तार-ओ-तौर-ओ-तर्ज़-ओ-रविश का ये ढब है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
رفتار و طور و طرز و روش کا یہ ڈھب ہے کیا
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किस हुस्न से कहूँ मैं उस की ख़ुश अख़्तरी की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کس حسن سے کہوں میں اس کی خوش اختری کی
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ख़त लिख के कोई सादा न उस को मलूल हो
मीर तक़ी मीर द्वारा
خط لکھ کے کوئی سادہ نہ اس کو ملول ہو
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हाल दिल 'मीर' का रो रो के सब ऐ माह सुना
मीर तक़ी मीर द्वारा
حال دل میرؔ کا رو رو کے سب اے ماہ سنا
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ग़ैर ने हम को ज़बह किया ने ताक़त है ने यारा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
غیر نے ہم کو ذبح کیا نے طاقت ہے نے یارا ہے
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ख़ूबी का उस की बसके तलबगार हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوبی کا اس کی بسکہ طلب گار ہو گیا
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मौसम-ए-गुल आया है यारो कुछ मेरी तदबीर करो
मीर तक़ी मीर द्वारा
موسم گل آیا ہے یارو کچھ میری تدبیر کرو
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अधर आ कर शिकार-अफ़गन हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر آ کر شکار افگن ہمارا
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क्या क्या बैठे बिगड़ बिगड़ तुम पर हम तुम से बनाए गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کیا بیٹھے بگڑ بگڑ تم پر ہم تم سے بنائے گئے
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मैं भी दुनिया में हूँ इक नाला-ए-परेशाँ यक जा
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں بھی دنیا میں ہوں اک نالہ پریشاں یک جا
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आज लब-ए-गौहर-फ़िशाँ आप ने वा नहीं किया
जौन एलिया द्वारा
آج لب گہر فشاں آپ نے وا نہیں کیا
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करेंगे शिक्व-ए-जौर-ओ-जफ़ा दिल खोल कर अपना
قمر جلالوی द्वारा
کریں گے شکوۂ جور و جفا دل کھول کر اپنا
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बजुज़ तुम्हारे किसी से कोई सवाल नहीं
قمر جلالوی द्वारा
بجز تمہارے کسی سے کوئی سوال نہیں
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चले थे यार बड़े ज़अम में हवा की तरह
अहमद फ़राज़ द्वारा
چلے تھے یار بڑے زعم میں ہوا کی طرح
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न शब-ओ-रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ شب و روز ہی بدلے ہیں نہ حال اچھا ہے
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ऐ ख़ुदा जो भी मुझे पंद-ए-शकीबाई दे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اے خدا جو بھی مجھے پند شکیبائی دے
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ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ اور بات ہے تجھ سے گلا نہیں کرتے
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न पूछ ख़्वाब ज़ुलैख़ा ने क्या ख़याल लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ پوچھ خواب زلیخا نے کیا خیال لیا
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