ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
शिकवा
सभी
145
अशआर
0
ग़ज़ल
145
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं
जौन एलिया द्वारा
گزراں ہیں گزرتے رہتے ہیں
0
उस ने हम को गुमान में रखा
जौन एलिया द्वारा
اس نے ہم کو گمان میں رکھا
0
सजदे तेरे कहने से मैं कर लूँ भी तो क्या हो
قمر جلالوی द्वारा
سجدے ترے کہنے سے میں کر لوں بھی تو کیا ہو
0
कौन से थे वो तुम्हारे अहद जो टूटे न थे
قمر جلالوی द्वारा
کون سے تھے وہ تمہارے عہد جو ٹوٹے نہ تھے
0
इस में कोई फ़रेब तो ऐ आसमाँ नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اس میں کوئی فریب تو اے آسماں نہیں
0
देखिये हो गई बदनाम मसीहाई भी
قمر جلالوی द्वारा
دیکھیے ہو گئی بد نام مسیحائی بھی
0
मुझे बाग़बां से गिला यह है कि चमन से बे-ख़बरी रही
قمر جلالوی द्वारा
مجھے باغباں سے گلہ یہ ہے کہ چمن سے بے خبری رہی
0
सब लोग लिए संग-ए-मलामत निकल आए
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب لوگ لیے سنگ ملامت نکل آئے
0
गुमान यही है कि दिल ख़ुद इधर को जाता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
گماں یہی ہے کہ دل خود ادھر کو جاتا ہے
0
दिल में अब ताक़त कहाँ ख़ूँ नाबा अफ़शानी करे
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل میں اب طاقت کہاں خوں نابہ افشانی کرے
0
हम ने किस रात नाला सर न किया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ہم نے کس رات نالہ سر نہ کیا
0
पैग़ाम ग़म जिगर का गुलज़ार तक न पहुँचा
मीर तक़ी मीर द्वारा
پیغام غم جگر کا گلزار تک نہ پہنچا
0
गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
گلا نہیں ہے ہمیں اپنی جاں گدازی کا
0
ऐसा तिरा रह गुज़र न होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ایسا ترا رہ گزر نہ ہوگا
0
ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
غم دنیا سے گر پائی بھی فرصت سر اٹھانے کی
0
यार मेरा बहुत है यार फ़रेब
मीर तक़ी मीर द्वारा
یار میرا بہت ہے یار فریب
0
जुज़ जुर्म-ए-इश्क़ कोई भी साबित किया गुनाह
मीर तक़ी मीर द्वारा
جز جرم عشق کوئی بھی ثابت کیا گناہ
0
ख़ुश न आई तुम्हारी चाल हमें
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش نہ آئی تمہاری چال ہمیں
0
ख़ूब थे वे दिन कि हम तेरे गिरफ़्तारों में थे
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوب تھے وے دن کہ ہم تیرے گرفتاروں میں تھے
0
ख़राबी कुछ न पूछो मिल्कत-ए-दिल की इमारत की
मीर तक़ी मीर द्वारा
خرابی کچھ نہ پوچھو ملکت دل کی عمارت کی
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें