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अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें
जौन एलिया द्वारा
عجب اک طور ہے جو ہم ستم ایجاد رکھیں
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تجھے ہے مشق ستم کا ملال ویسے ہی
अहमद फ़राज़ द्वारा
تجھے ہے مشق ستم کا ملال ویسے ہی
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सजदे तेरे कहने से मैं कर लूँ भी तो क्या हो
قمر جلالوی द्वारा
سجدے ترے کہنے سے میں کر لوں بھی تو کیا ہو
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सब लोग लिए संग-ए-मलामत निकल आए
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب لوگ لیے سنگ ملامت نکل آئے
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हम ने किस रात नाला सर न किया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ہم نے کس رات نالہ سر نہ کیا
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रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
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गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
گلا نہیں ہے ہمیں اپنی جاں گدازی کا
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रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہتا ہے ہڈیوں سے مری جو ہما لگا
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वाँ उसको हौल-ए-दिल है तो याँ मैं हूँ शर्म-सार
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
واں اس کو ہول دل ہے تو یاں میں ہوں شرم سار
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तेग़-ए-सितम से उस की मिरा सर जुदा हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیغ ستم سے اس کی مرا سر جدا ہوا
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कब से नज़र लगी थी दरवाज़-ए-हरम से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب سے نظر لگی تھی دروازۂ حرم سے
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हँसते हो रोते देख कर ग़म से
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہنستے ہو روتے دیکھ کر غم سے
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पेच रखते हो बहुत साहिबो दस्तार के बीच
अहमद फ़राज़ द्वारा
پیچ رکھتے ہو بہت صاحبو دستار کے بیچ
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क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
قتل عاشق کسی معشوق سے کچھ دور نہ تھا
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नाला जुज़ हुस्न-ए-तलब ऐ सितम-ईजाद नहीं
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
نالہ جز حسن طلب اے ستم ایجاد نہیں
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ख़त से वो ज़ोर-ए-सफ़ाई-ए-हुस्n अब कम हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
خط سے وہ زور صفائے حسن اب کم ہو گیا
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यक्सू कुशादा रूई पर चीं नहीं जबीं भी
मीर तक़ी मीर द्वारा
یکسو کشادہ روئی پر چیں نہیں جبیں بھی
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चाक पर चाक हुआ जूँ जूँ सिलाया हम ने
मीर तक़ी मीर द्वारा
چاک پر چاک ہوا جوں جوں سلایا ہم نے
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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
जौन एलिया द्वारा
ساری دنیا کے غم ہمارے ہیں
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अब तो मुँह से बोल मुझ को देख दिन भर हो गया
قمر جلالوی द्वारा
اب تو منہ سے بول مجھ کو دیکھ دن بھر ہو گیا
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