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पाये ख़िताब क्या क्या देखे अताब क्या क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
پائے خطاب کیا کیا دیکھے عتاب کیا کیا
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अब मीरؔ जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب میرؔ جی تو اچھے زندیق ہی بن بیٹھے
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क्या बुलबुल असीर है बे बाल-ओ-पर कि हम
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا بلبل اسیر ہے بے بال و پر کہ ہم
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गर्म हैं शोर से तुझ हुस्न के बाज़ार कई
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرم ہیں شور سے تجھ حسن کے بازار کئی
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सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
فیض احمد فیض द्वारा
ستم سکھلائے گا رسم وفا ایسے نہیں ہوتا
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ऐ तू कि रोज़ ओ शब को मह ओ आफ़ताब दे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اے تو کہ روز و شب کو مہ و آفتاب دے
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ख़ातिर करे है जमा वो हर बार एक तरह
मीर तक़ी मीर द्वारा
خاطر کرے ہے جمع وہ ہر بار ایک طرح
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शिकवा करूँ मैं कब तक उस अपने मेहरबाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
شکوہ کروں میں کب تک اس اپنے مہرباں کا
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ख़ंजर ब-कफ़ वो जब से सफ़्फ़ाक हो गया है
मीर तक़ी मीर द्वारा
خنجر بکف وہ جب سے سفاک ہو گیا ہے
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शश-जिहत से उस में ज़ालिम बू-ए-ख़ूँ की राह है
मीर तक़ी मीर द्वारा
شش جہت سے اس میں ظالم بوئے خوں کی راہ ہے
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रफ़्तार-ओ-तौर-ओ-तर्ज़-ओ-रविश का ये ढब है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
رفتار و طور و طرز و روش کا یہ ڈھب ہے کیا
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तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
मीर तक़ी मीर द्वारा
تمہیں بھی چاہیے ہے کچھ تو پاس چاہت کا
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ख़ूबी का उस की बसके तलबगार हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوبی کا اس کی بسکہ طلب گار ہو گیا
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क्या क्या बैठे बिगड़ बिगड़ तुम पर हम तुम से बनाए गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کیا بیٹھے بگڑ بگڑ تم پر ہم تم سے بنائے گئے
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चले थे यार बड़े ज़अम में हवा की तरह
अहमद फ़राज़ द्वारा
چلے تھے یار بڑے زعم میں ہوا کی طرح
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न पूछ ख़्वाब ज़ुलैख़ा ने क्या ख़याल लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ پوچھ خواب زلیخا نے کیا خیال لیا
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मेहर की तुझ से तवक़्क़ो थी सितम-गर निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
مہر کی تجھ سے توقع تھی ستم گر نکلا
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सुना है हाल तिरे कुश्तगाँ बेचारों का
मीर तक़ी मीर द्वारा
سنا ہے حال ترے کشتگاں بیچاروں کا
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गुज़रा बना-ए-चर्ख़ से नाला पगाह का
मीर तक़ी मीर द्वारा
گزرا بنائے چرخ سے نالہ پگاہ کا
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खोवें हैं नींद मेरी मुसीबत बयानियां
मीर तक़ी मीर द्वारा
کھوویں ہیں نیند میری مصیبت بیانیاں
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