Nayi Tarzon Se Maikhaane Mein Rang-e-Mai Jhalakta Tha
نئی طرزوں سے میخانے میں رنگ مے جھلکتا تھا
नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंنئی طرزوں سے میخانے میں رنگ مے جھلکتا تھا
گلابی روتی تھی واں جام ہنس ہنس کر چھلکتا تھا
Nayi tarzon se maikhaane mein rang-e-mai jhalakta tha
Gulabi roti thi waan jaam hans hans kar chhalakta tha
नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था
गुलाबी रोती थी वाँ जाम हँस हँस कर छलकता था

मीर तक़ी मीर1723–1810
शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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