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तन्हाई

सभी 169अशआर 0ग़ज़ल 169
ग़ज़ल169
याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
तेरी नज़रों पे तसदुक आज अहल-ए-होश हैं
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़सां सोख़्ता जाँ हूँ
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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