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याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
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तेरी नज़रों पे तसदुक आज अहल-ए-होश हैं
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
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मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़सां सोख़्ता जाँ हूँ
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
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ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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