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तन्हाई

सभी 169अशआर 0ग़ज़ल 169
ग़ज़ल169
ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया
ضبط کر کے ہنسی کو بھول گیا
हालत हाल के सबब हालत हाल ही गई
حالت حال کے سبب حالت حال ہی گئی
हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रखे
ہر کوئی دل کی ہتھیلی پہ ہے صحرا رکھے
तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
تیرے قریب آ کے بڑی الجھنوں میں ہوں
हर तमाशाई फ़क़त साहिल से मंज़र देखता
ہر تماشائی فقط ساحل سے منظر دیکھتا
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