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तन्हाई

सभी 169अशआर 0ग़ज़ल 169
ग़ज़ल169
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
کو بہ کو پھیل گئی بات شناسائی کی
बाहर गुज़ार दी कभी अंदर भी आएंगे
باہر گزار دی کبھی اندر بھی آئیں گے
जाने कहाँ गया है वो वो जो अभी यहाँ था
جانے کہاں گیا ہے وہ وہ جو ابھی یہاں تھا
तुम से भी अब तो जा चुका हूँ मैं
تم سے بھی اب تو جا چکا ہوں میں
तुम में जो बात है वो बात नहीं आई है
تم میں جو بات ہے وہ بات نہیں آئی ہے
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