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ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया
जौन एलिया द्वारा
ضبط کر کے ہنسی کو بھول گیا
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हालत हाल के सबब हालत हाल ही गई
जौन एलिया द्वारा
حالت حال کے سبب حالت حال ہی گئی
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हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रखे
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر کوئی دل کی ہتھیلی پہ ہے صحرا رکھے
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तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیرے قریب آ کے بڑی الجھنوں میں ہوں
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हर तमाशाई फ़क़त साहिल से मंज़र देखता
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر تماشائی فقط ساحل سے منظر دیکھتا
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अगरचे कोई भी अंधा नहीं था
Amjad Islam Amjad द्वारा
اگرچہ کوئی بھی اندھا نہیں تھا
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मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से
परवीन शाकिर द्वारा
مشکل ہے کہ اب شہر میں نکلے کوئی گھر سے
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एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
परवीन शाकिर द्वारा
ایک سورج تھا کہ تاروں کے گھرانے سے اٹھا
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गनवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैंने
जौन एलिया द्वारा
گنوائی کس کی تمنا میں زندگی میں نے
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हो गई शहर शहर रुसवाई
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہو گئی شہر شہر رسوائی
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दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
अहमद फ़राज़ द्वारा
دوست بن کر بھی نہیں ساتھ نبھانے والا
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नज़र बुझी तो करिश्मे भी रोज़-ओ-शब के गए
अहमद फ़राज़ द्वारा
نظر بجھی تو کرشمے بھی روز و شب کے گئے
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शैख़ आख़िर ये सुराही है कोई ख़ुम तो नहीं
قمر جلالوی द्वारा
شیخ آخر یہ صراحی ہے کوئی خم تو نہیں
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तुम को हम ख़ाक नशीनों का ख़याल आने तक
قمر جلالوی द्वारा
تم کو ہم خاک نشینوں کا خیال آنے تک
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तारा तारा उतर रही है रात समंदर में
Amjad Islam Amjad द्वारा
تارا تارا اتر رہی ہے رات سمندر میں
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साये ढलने चराग़ जलने लगे
Amjad Islam Amjad द्वारा
سائے ڈھلنے چراغ جلنے لگے
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ये ग़नीमत है कि उन आँखों ने पहचाना हमें
परवीन शाकिर द्वारा
یہ غنیمت ہے کہ ان آنکھوں نے پہچانا ہمیں
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वक़्त-ए-रुख़्सत आ गया दिल फिर भी घबराया नहीं
परवीन शाकिर द्वारा
وقت رخصت آ گیا دل پھر بھی گھبرایا نہیں
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याद अय्याम कि याँ तर्क-ए-शकेबाई था
मीर तक़ी मीर द्वारा
یاد ایام کہ یاں ترک شکیبائی تھا
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किसी से अहद-ओ-पैमाँ कर न रहियो
जौन एलिया द्वारा
کسی سے عہد و پیماں کر نہ رہیو
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