ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
तन्हाई
सभी
169
अशआर
0
ग़ज़ल
169
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
Amjad Islam Amjad द्वारा
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
0
तेरी नज़रों पे तसदुक आज अहल-ए-होश हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
0
मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़सां सोख़्ता जाँ हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
0
ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
0
काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
मीर तक़ी मीर द्वारा
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
0
जैसे हम बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम
فیض احمد فیض द्वारा
جیسے ہم بزم ہیں پھر یار طرح دار سے ہم
0
कब तलक ये सितम उठाइयेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تلک یہ ستم اٹھائیے گا
0
आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
0
हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہر گھڑی پیش نظر عشق میں کیا کیا نہ رہا
0
रही निगुफ़्ता मेरे दिल में दास्तान मेरी
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہی نگفتہ مرے دل میں داستاں میری
0
न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतज़ार कोई तो हो
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ حریف جاں نہ شریک غم شب انتظار کوئی تو ہو
0
ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ کیا کہ سب سے بیاں دل کی حالتیں کرنی
0
बंद था दरवाज़ा भी और घर में भी तन्हा था मैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
بند تھا دروازہ بھی اور گھر میں بھی تنہا تھا میں
0
पूरा दुख और आधा चाँद
परवीन शाकिर द्वारा
پورا دکھ اور آدھا چاند
0
हम से कुछ आगे ज़माने में हुआ क्या क्या कुछ
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم سے کچھ آگے زمانے میں ہوا کیا کیا کچھ
0
तेरी बातें ही सुनाने आए
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیری باتیں ہی سنانے آئے
0
क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तगू करे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیا ایسے کم سخن سے کوئی گفتگو کرے
0
फिरते हैं अब भी दिल को गरेबाँ किए हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
پھرتے ہیں اب بھی دل کو گریباں کیے ہوئے
0
इश्क़ ऐसा अजीब दरिया है
Amjad Islam Amjad द्वारा
عشق ایسا عجیب دریا ہے
0
है फ़सीलें उठा रहा मुझ में
जौन एलिया द्वारा
ہے فصیلیں اٹھا رہا مجھ میں
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें