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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जौन एलिया द्वारा
کتنے عیش سے رہتے ہوں گے کتنے اتراتے ہوں گے
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दर्द-ओ-अंदोह में ठहरा जो रहा मैं ही हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
درد و اندوہ میں ٹھہرا جو رہا میں ہی ہوں
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ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
अहमद फ़राज़ द्वारा
لے اڑا پھر کوئی خیال ہمیں
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वो दुश्मन-ए-जाँ जाँ से प्यारा भी कभी था
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ دشمن جاں جان سے پیارا بھی کبھی تھا
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जो भी दरून-ए-दिल है वो बाहर न आएगा
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو بھی درون دل ہے وہ باہر نہ آئے گا
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हवा ही लौ को घटाती वही बढ़ाती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
ہوا ہی لو کو گھٹاتی وہی بڑھاتی ہے
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बस्तियों में इक सदा-ए-बे-सदा रह जाएगी
Amjad Islam Amjad द्वारा
بستیوں میں اک صدائے بے صدا رہ جائے گی
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यूँ ही हैरान-ओ-ख़फ़ा जूँ ग़ुंचा-ए-तस्वीर हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
یوں ہی حیران و خفا جوں غنچۂ تصویر ہوں
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अक्स-ए-ख़ुश्बू हूँ बिखरने से न रोके कोई
परवीन शाकिर द्वारा
عکس خوشبو ہوں بکھرنے سے نہ روکے کوئی
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अब वो घर इक वीराना था बस वीराना ज़िंदा था
जौन एलिया द्वारा
اب وہ گھر اک ویرانہ تھا بس ویرانہ زندہ تھا
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कभी कभी तो बहुत याद आने लगते हो
जौन एलिया द्वारा
کبھی کبھی تو بہت یاد آنے لگتے ہو
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रूह प्यासी कहाँ से आती है
जौन एलिया द्वारा
روح پیاسی کہاں سے آتی ہے
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हम तो जैसे वहाँ के थे ही नहीं
जौन एलिया द्वारा
ہم تو جیسے وہاں کے تھے ہی نہیں
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उन के जाते ही यह वहशत का असर देखा किये
قمر جلالوی द्वारा
ان کے جاتے ہی یہ وحشت کا اثر دیکھا کئے
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अब क्या सोचें क्या हालात थे किस कारन ये ज़हर पिया है
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کیا سوچیں کیا حالات تھے کس کارن یہ زہر پیا ہے
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रिदा-ए-ज़ख़्म हर गुल-पैरहन पहने हुए है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ردائے زخم ہر گل پیرہن پہنے ہوئے ہے
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इस मंज़र-ए-सादा में कई जाल बंधे थे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس منظر سادہ میں کئی جال بندھے تھے
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कान लगा कर सुनती रातें बातें करते दिन
Amjad Islam Amjad द्वारा
کان لگا کر سنتی راتیں باتیں کرتے دن
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अपनी ही सदा सुनूँ कहाँ तक
परवीन शाकिर द्वारा
اپنی ہی صدا سنوں کہاں تک
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गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
گئے موسم میں جو کھلتے تھے گلابوں کی طرح
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