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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
परवीन शाकिर द्वारा
کو بہ کو پھیل گئی بات شناسائی کی
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बाहर गुज़ार दी कभी अंदर भी आएंगे
जौन एलिया द्वारा
باہر گزار دی کبھی اندر بھی آئیں گے
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जाने कहाँ गया है वो वो जो अभी यहाँ था
जौन एलिया द्वारा
جانے کہاں گیا ہے وہ وہ جو ابھی یہاں تھا
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तुम से भी अब तो जा चुका हूँ मैं
जौन एलिया द्वारा
تم سے بھی اب تو جا چکا ہوں میں
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तुम में जो बात है वो बात नहीं आई है
قمر جلالوی द्वारा
تم میں جو بات ہے وہ بات نہیں آئی ہے
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तेरा क़ुर्ब था कि फ़िराक़ था वही तेरी जल्वा-गरी रही
अहमद फ़राज़ द्वारा
ترا قرب تھا کہ فراق تھا وہی تیری جلوہ گری رہی
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तू कि अंजान है इस शहर के आदाब समझ
अहमद फ़राज़ द्वारा
تو کہ انجان ہے اس شہر کے آداب سمجھ
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चले थे यार बड़े ज़अम में हवा की तरह
अहमद फ़राज़ द्वारा
چلے تھے یار بڑے زعم میں ہوا کی طرح
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हम तो ख़ुश थे कि चलो दिल का जुनूँ कुछ कम है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم تو خوش تھے کہ چلو دل کا جنوں کچھ کم ہے
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ऐ ख़ुदा जो भी मुझे पंद-ए-शकीबाई दे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اے خدا جو بھی مجھے پند شکیبائی دے
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नहीं कि नामा-बरों को तलाश करते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہیں کہ نامہ بروں کو تلاش کرتے ہیں
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रात में इस कशमकश में एक पल सोया नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
رات میں اس کشمکش میں ایک پل سویا نہیں
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औरों का था बयान तो मौज-ए-सदा रहे
Amjad Islam Amjad द्वारा
اوروں کا تھا بیان تو موج صدا رہے
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एक आज़ार हुई जाती है शोहरत हम को
Amjad Islam Amjad द्वारा
ایک آزار ہوئی جاتی ہے شہرت ہم کو
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ये गर्द-बाद-ए-तमन्ना में घूमते हुए दिन
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ گرد باد تمنا میں گھومتے ہوئے دن
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उन ने किया था याद मुझे भूल कर कहीं
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ان نے کیا تھا یاد مجھے بھول کر کہیں
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मुझ सा बेताब होवे जब कोई
मीर तक़ी मीर द्वारा
مجھ سا بیتاب ہووے جب کوئی
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नम हैं पलकें तिरी ऐ मौज-ए-हवा रात के साथ
परवीन शाकिर द्वारा
نم ہیں پلکیں تری اے موج ہوا رات کے ساتھ
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गूँगे लबों पे हर्फ़-ए-तमन्ना किया मुझे
परवीन शाकिर द्वारा
گونگے لبوں پہ حرف تمنا کیا مجھے
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क्या तरह है आश्ना गाहे गहे ना आश्ना
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا طرح ہے آشنا گاہے گہے نا آشنا
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