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क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
قربتوں میں بھی جدائی کے زمانے مانگے
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अब के बरस दस्तूर-ए-सितम में क्या क्या बाब ईज़ाद हुए
فیض احمد فیض द्वारा
اب کے برس دستور ستم میں کیا کیا باب ایزاد ہوئے
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क्या मैं भी परेशानी-ए-ख़ातिर से क़रीं था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا میں بھی پریشانیٔ خاطر سے قریں تھا
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तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیرے ہوتے ہوئے محفل میں جلاتے ہیں چراغ
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अपनी ही आवाज़ को बे शक कान में रखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते
अहमद फ़राज़ द्वारा
ایسا ہے کہ سب خواب مسلسل نہیں ہوتے
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देखेगा जो तुझ रू को सो हैरान रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھے گا جو تجھ رو کو سو حیران رہے گا
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नया इक रिश्ता पैदा क्यों करें हम
जौन एलिया द्वारा
نیا اک رشتہ پیدا کیوں کریں ہم
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यूँ ही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
یوں ہی مر مر کے جئیں وقت گزارے جائیں
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बारिश में अहद तोड़ के गर मय-कशी हुई
قمر جلالوی द्वारा
بارش میں عہد توڑ کے گر مے کشی ہوئی
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मंज़िलें एक सी आवारगियाँ एक सी हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
منزلیں ایک سی آوارگیاں ایک سی ہیں
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तरे निसार न देखी कोई ख़ुशी मैंने
قمر جلالوی द्वारा
ترے نثار نہ دیکھی کوئی خوشی میں نے
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कशीदा सर से तवक़्क़ो अबस झुकाव की थी
अहमद फ़राज़ द्वारा
کشیدہ سر سے توقع عبث جھکاؤ کی تھی
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परदे में लाख फिर भी नुमूदार कौन है
Amjad Islam Amjad द्वारा
پردے میں لاکھ پھر بھی نمودار کون ہے
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न तो दिल का न जां का दफ़्तर है
जौन एलिया द्वारा
نہ تو دل کا نہ جاں کا دفتر ہے
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