Rahi Na Pukhtagi Aalam Mein Daur-e-Khaami Hai
رہی نہ پختگی عالم میں دور خامی ہے
रही न पुख़्तगी आलम में दौर-ए-ख़ामी है
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंرہی نہ پختگی عالم میں دور خامی ہے
ہزار حیف کمینوں کا چرخ حامی ہے
Rahi na pukhtagi aalam mein daur-e-khaami hai
Hazaar haif kameenoN ka charkh haami hai
रही न पुख़्तगी आलम में दौर-ए-ख़ामी है
हज़ार हैफ़ कमीनों का चर्ख़ हामी है

मीर तक़ी मीर1723–1810
शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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