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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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माइल-ब-करम मुझ पर हो जाएं तो अच्छा हो
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مائل بہ کرم مجھ پر ہو جائیں تو اچھا ہو
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जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
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जी में है याद रुख-ओ-ज़ुल्फ़-ए-सियाह-फ़ाम बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
جی میں ہے یاد رخ و زلف سیہ فام بہت
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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आशना नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کس کو سناؤں حال غم کوئی غم آشنا نہیں
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फ़क़ीराना आए सदा कर चले
मीर तक़ी मीर द्वारा
فقیرانہ آئے صدا کر چلے
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हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई
فیض احمد فیض द्वारा
ہم سادہ ہی ایسے تھے کی یوں ہی پذیرائی
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निकले है चश्मा जो कोई जोश-ए-ज़नां पानी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
نکلے ہے چشمہ جو کوئی جوش زناں پانی کا
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आह जिस वक़्त सर उठाती है
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ جس وقت سر اٹھاتی ہے
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तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है
فیض احمد فیض द्वारा
تیری صورت جو دل نشیں کی ہے
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हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہر گھڑی پیش نظر عشق میں کیا کیا نہ رہا
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अब आँखों में ख़ूं दम-ब-दम देखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب آنکھوں میں خوں دم بہ دم دیکھتے ہیں
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गरमी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तू देखो
فیض احمد فیض द्वारा
گرمئ شوق نظارہ کا اثر تو دیکھو
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हम अपने आँसुओं का अफ़साना क्या सुनाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم اپنے آنسوؤں کا افسانہ کیا سنائیں
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उस का ख़याल चश्म से शब ख़्वाब ले गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خیال چشم سے شب خواب لے گیا
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हम हुए तुम हुए कि मीर हुए
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم ہوئے تم ہوئے کہ میرؔ ہوئے
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जो इस शोर से मीर रोता रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو اس شور سے میرؔ روتا رہے گا
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रात के पिछले पहर रोने के आदी रोए
अहमद फ़राज़ द्वारा
رات کے پچھلے پہر رونے کے عادی روئے
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