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अब वही हर्फ़-ए-जुनूं सब की ज़बां ठहरी है
فیض احمد فیض द्वारा
اب وہی حرف جنوں سب کی زباں ٹھہری ہے
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے
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लज़्ज़त से नहीं ख़ाली जानों का खपा जाना
मीर तक़ी मीर द्वारा
لذت سے نہیں خالی جانوں کا کھپا جانا
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गुल को महबूब हम क़यास किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل کو محبوب ہم قیاس کیا
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आए हैं मीर काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ کافر ہو کر خدا کے گھر میں
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ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
زخم جھیلے داغ بھی کھائے بہت
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तुम हो शरीक-ए-ग़म तो मुझे कोई ग़म नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تم ہو شریک غم تو مجھے کوئی غم نہیں
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
मीर तक़ी मीर द्वारा
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تجھ کو ہم بھلا نہ سکے
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ऐ सनम तू सनम है निराला
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تو صنم ہے نرالا
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तेरी नज़रों पे तसदुक आज अहल-ए-होश हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
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हुस्न-ए-बुतां का इश्क़ मेरी जान हो गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حسن بتاں کا عشق مری جان ہو گیا
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आह जिस वक़्त सर उठाती है
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ جس وقت سر اٹھاتی ہے
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मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़साँ सख़्ता जाँ हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
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तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है
فیض احمد فیض द्वारा
تیری صورت جو دل نشیں کی ہے
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अंधेरे लाख छा जाएँ उजाला कम नहीं होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اندھیرے لاکھ چھا جائیں اجالا کم نہیں ہوتا
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इश्क़ में ज़िल्लत हुई ख़िफ़त हुई तोहमत हुई
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں ذلت ہوئی خفت ہوئی تہمت ہوئی
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आरज़ूएं हज़ार रखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
آرزوئیں ہزار رکھتے ہیں
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आए हैं मीरؔ मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ منہ کو بنائے خفا سے آج
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देखेगा जो तुझ रू को सो हैरान रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھے گا جو تجھ رو کو سو حیران رہے گا
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