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दुनिया के हर ख़याल से बेगाना कर दिया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
دنیا کے ہر خیال سے بیگانہ کر دیا
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आप बैठे हैं बालें पे मेरी मौत का ज़ोर चलता नहीं है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آپ بیٹھے ہیں بالیں پہ میری موت کا زور چلتا نہیں ہے
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
मीर तक़ी मीर द्वारा
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جو مٹا ہے تیرے جمال پر وہ ہر ایک غم سے گزر گیا
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इस का ख़राम देख के जाया न जाएगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خرام دیکھ کے جایا نہ جائے گا
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इश्क़-ए-सनम नमाज़ है है यही ज़िंदगी मिरी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
عشق صنم نماز ہے ہے یہی زندگی مری
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अब आँखों में ख़ूं दम-ब-दम देखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب آنکھوں میں خوں دم بہ دم دیکھتے ہیں
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छूटता ही नहीं हो जिसे आज़ार-ए-मोहब्बत
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھٹتا ہی نہیں ہو جسے آزار محبت
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छाती जला करे है सोज़-ए-दरूँ बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھاتی جلا کرے ہے سوز دروں بلا ہے
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यूं न आँखें बदल मुझ से मेरे सनम
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
یوں نہ آنکھیں بدل مجھ سے میرے صنم
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क्या मुवाफ़िक़ हो दवा इश्क़ के बीमार के साथ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا موافق ہو دوا عشق کے بیمار کے ساتھ
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कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ کرو فکر مجھ دوانے کی
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शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
شعر کے پردے میں میں نے غم سنایا ہے بہت
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है कहाँ का इरादा तुम्हारा सनम किस के दिल को अदाओं से बहलाओगे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے کہاں کا ارادہ تمہارا صنم کس کے دل کو اداؤں سے بہلاؤ گے
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या रब कोई हो इश्क़ का बीमार न होवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
یا رب کوئی ہو عشق کا بیمار نہ ہووے
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इश्क़ क्या क्या आफ़तें लाता रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق کیا کیا آفتیں لاتا رہا
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सह्ल यूं राह-ए-ज़िंदगी की है
فیض احمد فیض द्वारा
سہل یوں راہ زندگی کی ہے
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मक़ाम-ए-होश से गुज़रा मकाँ से ला-मकाँ पहुँचा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مقام ہوش سے گزرا مکاں سے لا مکاں پہنچا
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झुमके दिखा के तूर को जिन ने जला दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
جھمکے دکھا کے طور کو جن نے جلا دیا
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कहीं सकूं न मिला दिल को बज़्म-ए-यार के बाद
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کہیں سکوں نہ ملا دل کو بزم یار کے بعد
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