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बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
मीर तक़ी मीर द्वारा
بارے دنیا میں رہو غم زدہ یا شاد رہو
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वह और होंगे जिन को हरम की तलाश है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
وہ اور ہوں گے جن کو حرم کی تلاش ہے
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आज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
فیض احمد فیض द्वारा
عجز اہل ستم کی بات کرو
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न किसी पे ज़ख़्म अयां कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
فیض احمد فیض द्वारा
نہ کسی پہ زخم عیاں کوئی نہ کسی کو فکر رفو کی ہے
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न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
فیض احمد فیض द्वारा
نہ اب رقیب نہ ناصح نہ غم گسار کوئی
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आशिक़ी में मीर जैसे ख़्वाब मत देखा करो
अहमद फ़राज़ द्वारा
عاشقی میں میرؔ جیسے خواب مت دیکھا کرو
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अव्वल अव्वल की दोस्ती है अभी
अहमद फ़राज़ द्वारा
اول اول کی دوستی ہے ابھی
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अब नहीं सीने में मेरे जाए दाग़
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب نہیں سینے میں میرے جائے داغ
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दर्द-ओ-अंदोह में ठहरा जो रहा मैं ही हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
درد و اندوہ میں ٹھہرا جو رہا میں ہی ہوں
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इश्क़ मन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
عشق منت کش قرار نہیں
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गुल शर्म से बह जाएगा गुलशन में हो कर आब सा
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل شرم سے بہہ جائے گا گلشن میں ہو کر آب سا
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नहीं वसवस जी गँवाने के
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہیں وسواس جی گنوانے کے
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दिल बुतों पे निसार करते हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
دل بتوں پہ نثار کرتے ہیں
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जफ़ाएँ देख लियां बे-वफ़ाइयाँ देखें
मीर तक़ी मीर द्वारा
جفائیں دیکھ لیں یاں بے وفائیاں دیکھیں
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वफ़ा के बाब में इल्ज़ाम-ए-आशिक़ी न लिया
अहमद फ़राज़ द्वारा
وفا کے باب میں الزام عاشقی نہ لیا
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ख़ातिर करे है जमा वो हर बार एक तरह
मीर तक़ी मीर द्वारा
خاطر کرے ہے جمع وہ ہر بار ایک طرح
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रात प्यासा था मेरे लहू का
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات پیاسا تھا میرے لوہو کا
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मेरे दाग़-ए-दिल वो चराग़ हैं नहीं निस्बतें जिन्हें शाम से
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مرے داغ دل وہ چراغ ہیں نہیں نسبتیں جنہیں شام سے
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राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
فیض احمد فیض द्वारा
راز الفت چھپا کے دیکھ لیا
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ग़म ब-दिल शुक्र ब-लब मस्त-ओ-ग़ज़ल ख़्वाँ चलिए
فیض احمد فیض द्वारा
غم بہ دل شکر بہ لب مست و غزل خواں چلیے
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