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ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-हस्ती ग़म-ए-उल्फ़त ग़म-ए-दिल
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
غم دنیا غم ہستی غم الفت غم دل
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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
میرے رشکِ قمر تو نے پہلی نظر جب نظر سے ملائی مزا آ گیا
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रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम
فیض احمد فیض द्वारा
رنگ پیراہن کا خوشبو زلف لہرانے کا نام
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कब ठहरे गा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
فیض احمد فیض द्वारा
کب ٹھہرے گا درد اے دل کب رات بسر ہوگی
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किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया
فیض احمد فیض द्वारा
کس حرف پہ تو نے گوشۂ لب اے جان جہاں غماز کیا
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बाहोश वही हैं दीवाने उल्फ़त में जो ऐसा करते हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
باہوش وہی ہیں دیوانے الفت میں جو ایسا کرتے ہیں
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उस का ख़याल चश्म से शब ख़्वाब ले गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خیال چشم سے شب خواب لے گیا
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बातें हमारी याद रहें फिर बातें ऐसी न सुनिए गा
मीर तक़ी मीर द्वारा
باتیں ہماری یاد رہیں پھر باتیں ایسی نہ سنیے گا
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हम हुए तुम हुए कि मीर हुए
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم ہوئے تم ہوئے کہ میرؔ ہوئے
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हरीम-ए-शाह में देखी न ख़ानक़ाह में है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حریم شاہ میں دیکھی نہ خانقاہ میں ہے
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जल्वा जो तेरे रुख़ का एहसास में ढल जाए
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جلوہ جو ترے رخ کا احساس میں ڈھل جائے
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निकले वो फूल बन के तेरे गुलिस्तां से हम
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
نکلے وہ پھول بن کے ترے گلستاں سے ہم
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ख़बर ही नहीं कैसे अंगड़ाई ले कर निगाहें उठाए कि साग़र उठाए
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
خبر ہی نہیں کیسے انگڑائی لے کر نگاہیں اٹھائے کہ ساغر اٹھائے
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आओ कभू तो पास हमारे भी नाज़ से
मीर तक़ी मीर द्वारा
آؤ کبھو تو پاس ہمارے بھی ناز سے
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शाख़ पर ख़ून-ए-गुल रवाँ है वही
فیض احمد فیض द्वारा
شاخ پر خون گل رواں ہے وہی
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ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
غم اس کو ساری رات سنایا تو کیا ہوا
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यार ने हम से बे-अदाई की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یار نے ہم سے بے ادائی کی
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ता ब-मक़दूर इंतज़ार किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
تا بہ مقدور انتظار کیا
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हम हैं मज्रूः माजरा है ये
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم ہیں مجروح ماجرا ہے یہ
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दिल-ए-बेताब आफ़त है बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل بیتاب آفت ہے بلا ہے
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