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छूटता ही नहीं हो जिसे आज़ार-ए-मोहब्बत
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھٹتا ہی نہیں ہو جسے آزار محبت
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गिरां-ए-शब-ए-हिज्रां दो चंद क्या करते
فیض احمد فیض द्वारा
گرانئ شب ہجراں دو چند کیا کرتے
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छाती जला करे है सोज़-ए-दरूँ बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھاتی جلا کرے ہے سوز دروں بلا ہے
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या रब कोई हो इश्क़ का बीमार न होवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
یا رب کوئی ہو عشق کا بیمار نہ ہووے
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हम से कुछ आगे ज़माने में हुआ क्या क्या कुछ
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم سے کچھ آگے زمانے میں ہوا کیا کیا کچھ
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इश्क़ क्या क्या आफ़तें लाता रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق کیا کیا آفتیں لاتا رہا
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तुम अपनी याद से कह दो न जाए छोड़ के दिल
قمر جلالوی द्वारा
تم اپنی یاد سے کہہ دو نہ جائے چھوڑ کے دل
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हर तमाशाई फ़क़त साहिल से मंज़र देखता
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر تماشائی فقط ساحل سے منظر دیکھتا
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तीर जो उस कमान से निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیر جو اس کمان سے نکلا
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दस्त-ओ-पा मारे वक़्त-ए-बिस्मिल तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
دست و پا مارے وقت بسمل تک
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आओ कभू तो पास हमारे भी नाज़ से
मीर तक़ी मीर द्वारा
آؤ کبھو تو پاس ہمارے بھی ناز سے
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जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका
Amjad Islam Amjad द्वारा
جب بھی آنکھوں میں ترے وصل کا لمحہ چمکا
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वक़्त-ए-रुख़्सत आ गया दिल फिर भी घबराया नहीं
परवीन शाकिर द्वारा
وقت رخصت آ گیا دل پھر بھی گھبرایا نہیں
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बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं
जौन एलिया द्वारा
بڑا احسان ہم فرما رہے ہیں
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जो इस शोर से मीर रोता रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو اس شور سے میرؔ روتا رہے گا
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क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا حقیقت کہوں کہ کیا ہے عشق
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आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
अहमद फ़राज़ द्वारा
آنکھ سے دور نہ ہو دل سے اتر جائے گا
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हम तो यूँ ख़ुश थे कि इक तार-ए-गरेबाँ में है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم تو یوں خوش تھے کہ اک تار گریبان میں ہے
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जानां दिल का शहर नगर अफ़सोस का है
अहमद फ़राज़ द्वारा
جاناں دل کا شہر نگر افسوس کا ہے
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शब शम्अ पर पतंग के आने को इश्क़ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب شمع پر پتنگ کے آنے کو عشق ہے
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