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गुल-ओ-बुलबुल बहार में देखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل و بلبل بہار میں دیکھا
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अश्क आँख में फिर अटक रहा है
परवीन शाकिर द्वारा
اشک آنکھ میں پھر اٹک رہا ہے
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दुख नोश्ता है तो आँधी को लिखा आहिस्ता
परवीन शाकिर द्वारा
دکھ نوشتہ ہے تو آندھی کو لکھا آہستہ
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गर कुछ हो दर्द आईना यूं चर्ख़-ए-ज़िश्त में
मीर तक़ी मीर द्वारा
گر کچھ ہو درد آئینہ یوں چرخ زشت میں
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जिन के लिए अपने तो यूँ जान निकलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن کے لیے اپنے تو یوں جان نکلتے ہیں
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दोनों हैं उन के हिज्र का हासिल लिये हुए
قمر جلالوی द्वारा
دونوں ہیں ان کے ہجر کا حاصل لئے ہوئے
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सीन-ओ-दिल हसरतों से छा गया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
سینہ و دل حسرتوں سے چھا گیا
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पल में जहाँ को देखते मेरे डुबो चुका
मीर तक़ी मीर द्वारा
پل میں جہاں کو دیکھتے میرے ڈبو چکا
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जो न नक़्द-ए-दाग़-ए-दिल की करे शोला पासबानी
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جو نہ نقد داغ دل کی کرے شعلہ پاسبانی
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जराहत तोहफ़ा, अलमास अरमग़ां, दाग़-ए-जिगर हदिया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ
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फिर मिरे शहर से गुज़रा है वो बादल की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
پھر مرے شہر سے گزرا ہے وہ بادل کی طرح
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दिल की तरफ़ कुछ आह से दिल का लगाओ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کی طرف کچھ آہ سے دل کا لگاؤ ہے
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मर मर गए नज़र कर उस के बरहना तन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر مر گئے نظر کر اس کے برہنہ تن میں
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क्या कहिए कि ख़ूबां ने अब हम में है क्या रखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیے کہ خوباں نے اب ہم میں ہے کیا رکھا
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क़रार दिल का ये काहे को ढंग था आगे
मीर तक़ी मीर द्वारा
قرار دل کا یہ کاہے کو ڈھنگ تھا آگے
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ऐ सुब्ह मैं अब कहाँ रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
اے صبح میں اب کہاں رہا ہوں
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दर्द-ओ-अंदोह में ठहरा जो रहा मैं ही हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
درد و اندوہ میں ٹھہرا جو رہا میں ہی ہوں
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जो भी दरून-ए-दिल है वो बाहर न आएगा
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو بھی درون دل ہے وہ باہر نہ آئے گا
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वैसा कहाँ है हम से जैसा कि आगे था तू
मीर तक़ी मीर द्वारा
ویسا کہاں ہے ہم سے جیسا کہ آگے تھا تو
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क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
परवीन शाकिर द्वारा
کیا کرے میری مسیحائی بھی کرنے والا
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