ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
दर्द
सभी
123
अशआर
0
ग़ज़ल
123
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
क्या बुलबुल असीर है बे बाल-ओ-पर कि हम
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا بلبل اسیر ہے بے بال و پر کہ ہم
0
रात से आँसू मरी आँखों में फिर आने लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات سے آنسو مری آنکھوں میں پھر آنے لگا
0
पलकों पे थे पार-ए-जिगर रात
मीर तक़ी मीर द्वारा
پلکوں پہ تھے پارۂ جگر رات
0
जुदा जो पहलू से वो दिलबर यगाना हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
جدا جو پہلو سے وہ دلبر یگانہ ہوا
0
ग़लत है इश्क़ में ऐ बुलहवस अंदेशा राहत का
मीर तक़ी मीर द्वारा
غلط ہے عشق میں اے بوالہوس اندیشہ راحت کا
0
दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل عشق کا ہمیشہ حریف نبرد تھا
0
किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे
जौन एलिया द्वारा
کس سے اظہار مدعا کیجے
0
अब क्या सोचें क्या हालात थे किस कारन ये ज़हर पिया है
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کیا سوچیں کیا حالات تھے کس کارن یہ زہر پیا ہے
0
हवा के ज़ोर से पिंदार-ए-बाम-ओ-दर भी गया
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہوا کے زور سے پندار بام و در بھی گیا
0
नोहा-गरों में दीदा-ए-तर भी उसी का था
अहमद फ़राज़ द्वारा
نوحہ گروں میں دیدۂ تر بھی اسی کا تھا
0
मुए सहते सहते जफ़ा-कारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
موے سہتے سہتے جفا کاریاں
0
तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
تم اپنے شکوے کی باتیں نہ کھود کھود کے پوچھو
0
जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب سے اس بے وفا نے بال رکھے
0
जो मैं न हूँ तो करो तर्क नाज़ करने को
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو میں نہ ہوں تو کرو ترک ناز کرنے کو
0
तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
मीर तक़ी मीर द्वारा
تمہیں بھی چاہیے ہے کچھ تو پاس چاہت کا
0
ताक़त नहीं है जी में ने अब जिगर रहा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
طاقت نہیں ہے جی میں نے اب جگر رہا ہے
0
ग़ैर ने हम को ज़बह किया ने ताक़त है ने यारा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
غیر نے ہم کو ذبح کیا نے طاقت ہے نے یارا ہے
0
क्या कहें आतिश-ए-हिज्राँ से गले जाते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیں آتش ہجراں سے گلے جاتے ہیں
0
ज़बाँ रख ग़ुंचा सा अपने दहन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
زباں رکھ غنچہ ساں اپنے دہن میں
0
अधर आ कर शिकार-अफ़गन हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر آ کر شکار افگن ہمارا
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें